!! समझ और बुद्धि !!
एक समय कि बात है, बादशाह अकबर अपने दरवारियों के साथ दरबार में बैठे हुए थे। तभी शंदेशा आया कि ईरान के शाह अपने दूत को भेजा है, बादशाह के कहने पर दूतो को दरवार में बुलाया गया। दूत ने आकर राजा का अभिनन्दन किया, फिर बोला महारज मैं ईरान के शाह के तरफ से भेजे गे तोफे को पेश करने की इजाजत चाहता हूँ।
इजाजत मिलने पर तोफे के ऊपर से ढाका हुआ कपड़ा हटाया गया तो, उसके अंदर खुबशुरत पिंजरे में एक शेर था। दूत सन्देश पढ़ने लगा जो ईस प्रकार था,
"भारत के शहंशा और मेरे मित्र अकबर महान को हमारा सलाम, पहेलियाँ बुझने के परंपरा के शिलशिले में हमें लगता है कि हमें आपके लिए एक सही चुनौती मिली है। आप जैसा की देख रहे है, पिंजरे में एक नकली शेर है, और चुनौती यह है की पिंजरे को छुए बीना, पिंजरा खली करना है। शेर को भी नहीं छूना है, इसके लिए सिर्फ तीन बरी मिलेगी। तीन आदमी, और तीनो को एक एक बरी मिलेगी। मुझे यकीन है की आपको पहेली सुलझाने में बहुत मजा आएगा। आपका मित्र शाहेइरान।"
और एतना कह केर दूत दरबार में बैठ गया। तब अकबर ने अपने दरबारियों को देखा, फिर बीरबल से बोला, "बिरबरल आपका क्या सुझाव है ?, बीरबल बोले महाराज आपकी इजाजत हो तो मेरे पास एक सुझाओ है" , बीरबल बात कर ही रहे थे की एक दरबारी बिच में ही बोल पारा, महाराज हमें भी एक मौका दिया जाए।
अकबर बोले जरूर -जरूर, उस दरबारी ने एक जादूगर को बुलाया और सारी बात बताई, पिंजरा और शेर को छुए बिना पिंजरा खली करना है , जादूगर से कुछ न हुआ। फिर अकबर बीरबल से बोले, तभी एक दूसरा दरबारी करा हो गया और बोला, जहाँपनाह मुझे भी एक मौका दिया जाए, महाराज के इजाजत पर उसने एक तांत्रिक को बुलाया उस तांत्रिक से भी कुछ न हुआ। तब अकबर बोले दो मौका निकल गया अब तीसरा और अंतिम मौका है , बीरबल आप इस गुथ्थी को क्यों नहीं सुलझाते, बीरबल बोले जरूर बादशाह और तब बीरबल पिंजरे के पास गए और चारो तरफ से पिंजरे के चारो तरफ घूमकर उसका निरकछन किया, और बोले जहाँपना मुझे आग से धधकता हुआ एक अँगीठी चाहिए, राजा के आदेश पर तुरंत अँगीठी आगई, आग से धधकती अँगीठी को बीरबल ने उस पिंजरे के नीचे रख दिया , धीरे धीरे शेर गायब हो गया और पिंजरा खली हो गया। यह कारनामा देख कर सभी दरबारियों ने बीरबल की भूरी भूरी प्रंशंशा करने लगे। महराज बोले शाबाश बीरबल शाबाश, बीरबल बोले बहुत आसान था जहाँपनाह , शेर मोम का बना हुआ था, इस गुथ्थी को सुलझाने के लिए यही समझना जरुरी था।

तभी दूत बोला जहाँपना आपके सभी रत्नों में बीरबल बेशक सबसे क़ीमती रत्न है। इतना कहते ही सारे दरबारी बीरबल की जय जय कार करने लगे।
तब अकबर बोले " शाबाश बीरबल आपने फिर एक बार साबित कर दिया की ज्यादा तर परेशानियाँ सुलझाने के लिए केवल बुद्धि और समझ की जरुरत होती है , शाबाश। "
दोस्तों इस कहानी से हमें सीख मिलती है की, परेशानी कैसे भी हो, हम अपने समझ और बुद्धि से उससे निपट सकते है। हा ऐसा हो सकता है की कभी परेशानी कुछ अलग हो पर ये बाते कही न कही उसपे असर डालती हैं।
!!धन्यबाद!!
***
Comments
Post a Comment