वीर बालक पृथ्वी सिंह

वीर बालक पृथ्वी सिंह 

दिल्ली में जब औरंजेब का सासन था, उस वक्त वहां दरवार में के राजा उपस्थित थे, तभी वहां एक शिकारी एक शेर लेकर आया। शेर बहुत खूंखार था, वह बराबर दहाड़ रहा था।  उस शेर को देखकर औरंजेब बोला, इससे ज्यादा खूंखार शेर मैंने आज तक नहीं देखा, और इससे जयादा खूंखार कोई दूसरा शेर हो भी सकता, तभी वहां जसबंत सिंह जो उस समय योधपुर के राजा थे, वो बोलपरे ऐसा नहीं है महाराज मेरे पास इससे भी भयानक शेर है जो इसको धूल चटा सकता है।  पुरे दरवार में सन्नाटा छा गया, तब औरंजेब ने कहा  यदि ऐसा है तो कल उसे मैदान में पेश किया जय, मैं इस शेर को तुम्हारे शेर से मुकाबला करवाऊंगा, फिर देखते है कोन ज्यादा ताकतवर है।  दूसरे दिन मैदान में बहुत ही भीड़ थी सैकड़ो के तादात में लोग जमा हुए थे सभी ये देखना कहते थे की ईस भयानक शेर से कौन टककर लेगा।  तभी यशबंत सिंह वहां आय और उनके साथ उनका बारह वर्षिये पुत्र पृथ्वी सिंह भी साथ थे, तभी औरंजेब बोलै, यशबंत सिंह तुम्हारा शेर कहा है तुम अकेले हो ? यशबंत सिंह बोले महारज आप अपना शेर ले आइये मेरा शेर तैयार बैठा है।  औरंजेब का शेर मैदान में आया वो जोर जोर से दाहाड़ रहा था, तब यशबंत सिंह ने कहा जाओ बेटा दिखादो इन्हें एक सच्चे हिन्दुस्तानी में कितना ताकत होती है।  यह देखकर सभी लोग हैरान और परेशान थे की इस खूंखार शेर से बारह शाल का लड़का लड़ेगा, सबो ने अपने दाते तले उंगलिया दबा ली, औरंजेब भी परेशान ये क्या, लेकिन वो बालक ऐसे चल रहा मनो, ये उसके रोज का काम हो।  जब वो मैदान में आया तो शेर ने उसे देख कर बहुत जोर से दहाड़ लगाई, इसपर पृथ्वी सिंह ने अपनी तलवार निकाल ली , तभी यशबंत सिंह ने कहा " पुत्र शेर के पास तलवार नहीं है! " तभी पृथ्वी सिंह ने तलवार फेंक दी, और शेर से निहत्थे भीड़ गए, बहुत देर लड़ने के बाद पृथ्वी सिंह ने शेर का जबड़ा पकड़ा और उसे दो भागो में चिर दिया, सब लोग हैरान परेशान, तभी खून से लदपद पृथ्वी सिंह बहार आय, यशबंत सिंह ने उन्हें गले लगा लिया, और बोले यह है मेरा सच्चा शेर, मेरा पुत्र! औरंजेब मै इसी शेर की बात कर रहा था, औरंजेब के पास कहें को कोई शब्द नहीं था।
कठिनाई कैसी भी हो अगर हौशला बुलंद हो तो आप उस कठिनाई को पार कर सकते है।  जज्बा होनी चाहिए।

 मिलते है फिर अगले पोस्ट में........ 
धन्यबाद  





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